फौज़िया जी को मेंरा सलाम!

फौज़िया जी को मेंरा सलाम! आपने जिस तरह मर्दो की बुराईयों के खिलाफ आवाज़ उठाई, वह वाकई में काबिले-तारीफ है। और मर्दो में अक्सर होने वाली इन बुराईयों का विरोध अवश्य ही होना चाहिए। अब तक औरतें निरक्षरता की वजह से बेवकूफ बनती आई हैं और अक्सर मर्द अपने अहम के कारण उनको पैर की जूती समझते आए है। यह एक अमानवीय व्यवहार है और इसको बर्दाश्त करने वाले हम जैसे लोग भी इसके लिए उतने ही ज़िम्मेदार हैं जितने इस तरह की सोच रखने वाले अन्य मर्द। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की कोई भी धर्म उनको ऐसा करने की इजाज़त देता...
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धर्म वही है जिसकी बातें हर युग में प्रासंगिक हों वर्ना वह साधारण ज्ञान है

प्रवीण जी ने कहा: सभी धर्मों के धर्मग्रंथों में बहुत सी ऐसी बातें लिखी गई या बताई गई हैं जो उस युग के मनुष्य की अवैज्ञानिक धारणाओं, सीमित सोच, सीमित ज्ञान (या अज्ञान), तत्कालीन देश-काल की परिस्थितियों व लेखक के अपने अनुभवों या मजबूरियों पर आधारित हैं, आज के युग में इन मध्य युगीन या उससे भी प्राचीन बातों की कोई प्रासंगिकता या उपयोग नहीं रहा, यह सब बातें आज आदमी की कौम को जाहिलियत व वैमनस्य की ओर धकेल...
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ब्लॉग निरस्त करवाने की धमकियाँ!

ब्लॉग "प्रेम रस" के लेख "एक-दूसरे के धर्म, आस्था अथवा लेखों की आलोचनाओं में व्यतीत होता समय" पर कुछ लोगों ने मुझे मेरा ब्लॉग निरस्त होने की धमकी दी! उन लोगो को तो मैंने जवाब दे दिया. पर मैं आप लोगो से मालूम करना चाहता हूँ कि क्या गलतियाँ केवल एक तरफ से हो रही है? क्या चुप-चाप कमेंट्स करने वाले लोग वहीँ हैं जिन्हें आप सोच रहे हैं? यह भी तो हो सकता है, कि उनकी जगह एक-दुसरे को लड़वाने वाले लोग...
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डॉ. अनवर जमाल साहब अब बहुत हो गया - शाहनवाज़ सिद्दीकी

आखिर कब तक उकसावे में आकर अपनी उर्जा को बर्बाद करते रहोगे! जैसे लेखन का प्रयोग आपने अपनी पुस्तक "दयानंद जी ने क्या खोया क्या पाया" में किया था, अपनी प्रतिभा को वैसे ही प्रयोग करिए, ताकि लोगो ने जो इस्लाम के बारे में मिथ्या प्रचार फैला रखा है, उसका अंत हो. वैसे भी इंसान को हमेशा मधुर वाणी  का प्रयोग करना चाहिए, कटु- वाणी के प्रयोग से कभी भी बात के महत्त्व का पता नहीं चलता है. कुछ लोग आपको...
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जीवन का उद्देश्य क्या है?

एक ज्ञान वह है जो मनुष्य की आवश्यकताओं से सम्बंधित होता है, जिसे दुनिया का ज्ञान कहते हैं. इसके लिए ईश्वर ने कोई संदेशवाहक नहीं भेजा, बल्कि वह ज्ञान ईश्वर ने मस्तिष्क में पहले से सुरक्षित कर दिया है. जब किसी चीज़ की आवश्यकता होती है तो मनुष्य मेहनत करता है, उस पर रास्ते खुलते चले जाते हैं. एक ज्ञान यह है जो जीवन के मकसद से सम्बंधित है कि "मनुष्य दुनिया में आया क्यों है?" अब यह स्वयं...
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गैर-मुसलमानों के साथ संबंधों के लिए इस्लाम के अनुसार दिशानिर्देश

हमें विस्तार से पता होना चाहिए कि इस्लाम के अनुसार मुसलमानों को गैर-मुसलमानों के साथ कैसे संबंध रखने चाहिए और कैसे उनके साथ इस्लामी शरी'अह के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिए? सब तारीफें अल्लाह के ही लिए हैं. पहली बात तो यह कि इस्लाम दया और न्याय का धर्म है. इस्लाम के लिए इस्लाम के अलावा अगर कोई और शब्द इसकी पूरी व्याख्या कर सकता है तो वह है न्याय". मुसलमानों को आदेश है कि ग़ैर-मुसलमानों को...
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क्या धरती पहाडो की वजह से टिकी है?

वैज्ञानिक पर्वतों के महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि यह पृथ्वी को स्थिर रखने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं:'पर्वतों में अंतर्निहित जड़ें होती है. यह जड़ें गहरी मैदान में घुसी हुई होती हैं, अर्थात, पर्वतों का आकार खूंटो अथवा कीलों की तरह होता है. पृथ्वी की पपड़ी 30 से 60 किलोमीटर गहरी है, यह seismograph (स्वचालित रूप से तीव्रता, दिशा रिकॉर्डिंग और जमीन की हलचल की अवधि बताने वाले उपकरण) से ज्ञात होता है. इसके...
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क्या कुरआन के अनुसार पृथ्वी गोल नहीं समतल है?

कुछ लोगो को लगता है कि कुरआन के अनुसार पृथ्वी समतल है जबकि  कुरआन की एक भी आयत यह नहीं कहती है कि पृथ्वी समतल (फ्लैट) है. कुरआन केवल एक कालीन के साथ पृथ्वी की पपड़ी की तुलना करता है. कुछ लोगों को लगता है की कालीन को केवल एक निरपेक्ष समतल सतह पर ही रखा जा सकता हैं. लेकिन ऐसा नहीं है, किसी कालीन को पृथ्वी जैसे किसी बड़े क्षेत्र पर फैलाया जा सकता...
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क्‍या इस्लाम अनुसार बच्चा गोद लेना सही है?

प्रश्न: क्या इस्लाम के अनुसार बच्चा गोद लेना सही नहीं है? क्या किसी को बेटा अथवा बेटी माना जा सकता है?उत्तर: बच्चे को गोद लिया जा सकता है, बल्कि  गरीब बच्चों का पालन-पोषण करना पुन्य का काम है. परन्तु बालिग़ होने पर उनको सामान्यत: घर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती हैं. यही नियम चचेरे-ममेरे भाईओं के लिए भी है. अर्थात उनके घर में...
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